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ईसाई धर्म — भारत का विनम्र उपहार
ईसाई धर्म — भारत का विनम्र उपहार इतिहास, आस्था और सभ्यतागत संवाद की एक शोधपरक यात्रा है। यह पुस्तक ईसा के जीवन के तथाकथित “मौन वर्षों”, भारत और पश्चिम के प्राचीन संपर्कों तथा भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं और ईसाई विचारों के बीच संभावित समानताओं की पड़ताल करती है।
क्या ईसा के जीवन के तथाकथित “मौन वर्षों” का संबंध भारत से रहा हो सकता है? ईसाई धर्म — भारत का विनम्र उपहार इसी प्रश्न से आरम्भ होने वाली एक ऐतिहासिक और सभ्यतागत खोज है। लेखक दिनेश चंद्र रावत भारत और पश्चिम के बीच प्राचीन व्यापारिक तथा सांस्कृतिक संपर्कों, हिमालय और कश्मीर से जुड़ी परंपराओं, एस्सीन समुदाय, सेंट थॉमस की भारतीय परंपरा तथा भारतीय आध्यात्मिक चिंतन और ईसा की शिक्षाओं के बीच दिखाई देने वाली समानताओं का परीक्षण करते हैं। पुस्तक किसी धर्म का विरोध करने का प्रयास नहीं करती। इसका उद्देश्य इतिहास, स्मृति, परंपरा और उपलब्ध संकेतों को साथ रखकर ऐसे प्रश्न उठाना है जिन पर आगे शोध और खुली चर्चा की जा सके। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो धर्मों और सभ्यताओं के इतिहास को केवल स्थापित कथाओं के माध्यम से नहीं, बल्कि प्रश्न, तुलना और स्वतंत्र विचार के साथ समझना चाहते हैं।
- 01 पररचय — यह खोज क्यों आवश्यक है
- 02 अध्याय 1 — मााँ ने जो प्रश्न दिया
- 03 अध्याय 2 — भारत : ववश्व का शाश्वत ववश्वववद्यालय
- 04 अध्याय 3 — एसीन : यहूदिया के मरुभूशम योगी
- 05 अध्याय 4 — क्रूस और गुप्त यात्रा
- 06 अध्याय 5 — भारत–यात्रा : क्रूस से दहमालय तक
- 07 अध्याय 6 — हेशमस की तीथायात्रा और मौन की घाट
- 08 अध्याय 7 — मध्यवती वर्ा : जि खोज पुकार िन गई
- 09 अध्याय 8 — रोजािल : समाधध और साक्ष्य
- 10 अध्याय 9 — माई मर िा अस्थान : मााँ का मींदिर
- 11 अध्याय 10 — सेंट थॉमस भारत में : पश्श्चम से पहले का पहला ईसाई
- 12 अध्याय 11 — मौन के सींरक्षक : सूफी और नाथ योगी
- 13 अध्याय 12 — पुनःआववष्कार : तनरन्तरता, चेतना और आस्था का भववष्य
- ◆ ऐतिहासिक दावों और स्थापित कथाओं पर प्रश्न कैसे उठाए जाएँ।
- ◆ विभिन्न धार्मिक और सभ्यतागत परंपराओं की तुलना कैसे की जाए।
- ◆ इतिहास, परंपरा और व्याख्या के बीच अंतर को अधिक स्पष्ट रूप से समझना।
- ◆ किसी विवादास्पद ऐतिहासिक विषय को खुले और सम्मानपूर्ण दृष्टिकोण से देखना।
- ◆ ऐतिहासिक स्रोतों और परंपराओं की तुलना
- ◆ सभ्यताओं के बीच विचारों और ज्ञान का आदान-प्रदान
- ◆ आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक स्मृति का विश्लेषण
“सभ्यता विजय की नहीं, चेतना की कथा है।”
“ज्ञान किसी एक देश का नहीं होता, वह पृथ्वी की आत्मा का साझा प्रकाश है।”
“सत्य किसी का नहीं, सबका है।”
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